होम / ब्लॉग

हिंदी

बिटकॉइन या सोना? एक भारतीय सवाल, सीधे जवाब के साथ

बिटकॉइन और सोना दोनों कमी (scarcity) पर टिके हैं, पर जोखिम और नियम बिल्कुल अलग हैं। एक भारतीय परिवार के नज़रिए से तुलना, सलाह नहीं।

सनी रे, Unocoin के सह-संस्थापक · · पढ़ने में 7 मिनट

बिटकॉइन या सोना, कौन सा बेहतर है? इसका ईमानदार जवाब यह है कि यह सवाल ही थोड़ा ग़लत है। दोनों अलग चीज़ें हैं, अलग जोखिम के साथ, और अलग नियमों के तहत। सोना हज़ारों साल से भरोसे की चीज़ है और भारत में घर-घर में है। बिटकॉइन कहीं नया है, पूरी तरह डिजिटल है, उसकी कुल संख्या 2 करोड़ 10 लाख (21 मिलियन) पर तय है, और उसकी कीमत बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे होती है।

तो यह लेख आपको यह नहीं बताएगा कि क्या खरीदें। यह बताएगा कि दोनों में क्या मिलता-जुलता है, कहाँ तुलना टूट जाती है, और किन सवालों पर आपको ख़ुद सोचना चाहिए। मैं Unocoin का सह-संस्थापक हूँ, इसलिए मेरी राय साफ़ है और मैं उसे राय की तरह ही रखूँगा।

हर भारतीय परिवार कमी (scarcity) को समझता है

मुझे यह बात किसी किताब ने नहीं सिखाई, भारत ने सिखाई। हमारे यहाँ शादी हो, दिवाली हो, धनतेरस हो, सोना खरीदना सिर्फ़ ख़रीदारी नहीं, परंपरा है। World Gold Council की 2019 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में शायद 25,000 टन तक सोना है। यह आँकड़ा बताता है कि भारतीय परिवार एक बात सहज रूप से जानते हैं: जो चीज़ कम है और जिसे आसानी से बनाया नहीं जा सकता, उसका मूल्य टिकता है।

जब मैं लोगों को बताता हूँ कि भारत और बिटकॉइन का रिश्ता मुझे स्वाभाविक क्यों लगता है, तो मेरा तर्क यही होता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के बाज़ारों में से है, और बिटकॉइन को लोग डिजिटल गोल्ड कहते हैं। मुझे इन दोनों के बीच एक सीधा रिश्ता दिखता है। यह मेरी राय है, कोई वादा नहीं।

सोना क्या अच्छा करता है

सोने की तारीफ़ पहले, क्योंकि वह इसका हक़दार है।

  • भरोसा: दादी-नानी से लेकर आज तक, हर पीढ़ी सोने को समझती है। उसे समझाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
  • हाथ में होना: गहना पहना जा सकता है, देखा जा सकता है, विरासत में दिया जा सकता है।
  • लंबा इतिहास: हज़ारों साल से सोना मूल्य का माध्यम रहा है।
  • भावना: सोना सिर्फ़ संपत्ति नहीं, एक रिश्ता है, एक आशीर्वाद है।

इनमें से कोई भी बात हल्की नहीं है। बिटकॉइन के बारे में सोचते हुए भी इन्हें भूलना नहीं चाहिए।

बिटकॉइन सोने से क्या लेता है

बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह सोने की सबसे बड़ी ख़ूबी, कमी, को डिजिटल रूप में लाने की कोशिश करता है। कुछ बातें जो मुझे ख़ास लगती हैं:

  • तय सीमा: कभी भी 2 करोड़ 10 लाख से ज़्यादा बिटकॉइन नहीं होंगे, और यह सीमा सॉफ़्टवेयर में लिखी है। सोने के बारे में मेरा तर्क यह है कि नई खदानें मिल सकती हैं; बिटकॉइन की सप्लाई में ऐसा नहीं होता।
  • बाँटना आसान: एक बिटकॉइन 10 करोड़ सातोशी (sats) में बँटता है। आपको पूरा सिक्का खरीदने की ज़रूरत नहीं। ₹10 का भी खरीद सकते हैं।
  • भेजना आसान: बिटकॉइन दुनिया में कहीं भी मिनटों में भेजा जा सकता है, बिना ट्रक, लॉकर या गार्ड के।
  • अपनी चाबी, अपनी कस्टडी: आप चाहें तो बिटकॉइन को अपने वॉलेट में रख सकते हैं, जहाँ उसकी चाबी सिर्फ़ आपके पास हो।

तुलना कहाँ टूटती है: उतार-चढ़ाव और नियम

अब ईमानदारी वाला हिस्सा। यहाँ आकर डिजिटल गोल्ड वाली तुलना कमज़ोर पड़ती है, और यह आपको पता होना चाहिए।

पहला, उतार-चढ़ाव। बिटकॉइन की कीमत बहुत तेज़ी से ऊपर और नीचे जाती है। कुछ ही हफ़्तों में बड़ी गिरावट आम बात है। सोने की कीमत भी बदलती है, पर बिटकॉइन का झूला कहीं ज़्यादा बड़ा है। सिर्फ़ उतना ही लगाइए जितना आप बड़ी गिरावट में भी बिना घबराए रख सकें।

दूसरा, नियम। भारत में क्रिप्टो उत्पाद अनरेगुलेटेड हैं और जोखिम भरे हो सकते हैं। किसी नुकसान पर कोई रेगुलेटरी सहारा न मिले, ऐसा हो सकता है। प्लेटफ़ॉर्म्स को FIU-IND के साथ PMLA के तहत रिपोर्टिंग एंटिटी के रूप में रजिस्टर होना होता है। Unocoin FIU-IND के साथ रजिस्टर्ड है, पर इसका मतलब यह नहीं कि बिटकॉइन की कीमत की कोई सुरक्षा है।

तीसरा, टैक्स। बिटकॉइन जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) पर Finance Act 2022 के नियम लागू हैं: मुनाफ़े पर 30% टैक्स और उस पर 4% सेस, बिक्री पर 1% TDS, नुकसान को किसी और आय से सेट-ऑफ़ नहीं किया जा सकता, और हर बिक्री ITR के Schedule VDA में दिखानी होती है। सोने पर टैक्स के नियम अलग हैं। अपनी स्थिति के लिए CA से ज़रूर बात कीजिए। पूरी जानकारी हमारी टैक्स गाइड में है।

चौथा, उपयोग। सोना गहना भी है और संपत्ति भी। बिटकॉइन का कोई गहना नहीं बनता। उसका मूल्य पूरी तरह इस पर टिका है कि लोग उसे पैसे के रूप में कितना भरोसा देते हैं।

दोनों रखना: एक सवाल, सलाह नहीं

मैं आपको यह नहीं कहूँगा कि सोना छोड़कर बिटकॉइन लीजिए, या उल्टा। ऐसी सलाह देना मेरा काम नहीं है और यह सही भी नहीं होगा। पर कुछ सवाल हैं जो मैं हर उस परिवार से पूछने को कहूँगा जो पहली बार बिटकॉइन के बारे में सोच रहा है:

  1. क्या घर में सबको समझ है कि बिटकॉइन की कीमत आधी भी हो सकती है?
  2. अगर ऐसा हुआ तो क्या कोई ज़रूरी ख़र्च, जैसे पढ़ाई या इलाज, उससे प्रभावित होगा?
  3. क्या आपको पता है कि टैक्स कैसे लगेगा और रिकॉर्ड कैसे रखने हैं?
  4. क्या आप जानते हैं कि OTP, पासवर्ड और रिकवरी फ़्रेज़ कभी किसी को नहीं देने हैं?

अगर इन सवालों के जवाब साफ़ हैं, तो एक छोटी शुरुआत समझने का अच्छा तरीका हो सकती है। बहुत से लोग एक बड़ी रकम एक दिन में लगाने की बजाय SBP (Systematic Buying Plan) से सीखते हैं, जो हर दिन, हफ़्ते या महीने एक तय रुपये की रकम खरीदता है। Unocoin पर यह ₹10 से शुरू होता है और SBP ट्रेड पर फ़ीस 0% है। रकम तय रहती है, इसलिए कीमत कम होने पर ज़्यादा sats मिलते हैं और ज़्यादा होने पर कम। इसे रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं। यह जोखिम ख़त्म नहीं करता, बस समय चुनने का दबाव कम करता है। ज़्यादा जानकारी बिटकॉइन SIP पेज पर है।

रखने का तरीका: लॉकर बनाम चाबी

सोना और बिटकॉइन रखने का तरीका भी बिल्कुल अलग है, और यह फ़र्क अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।

सोना आप घर की तिजोरी में रखते हैं या बैंक लॉकर में। चोरी का डर रहता है, पर गहना खो जाए तो कम से कम पता होता है कि क्या खोया। बिटकॉइन के लिए दो रास्ते हैं। पहला, एक्सचेंज अकाउंट, जहाँ चाबी प्लेटफ़ॉर्म के पास रहती है। Unocoin अपनी साइट पर बताता है कि उसके 95% एसेट्स कोल्ड स्टोरेज में, मल्टी-सिग्नेचर वॉलेट्स के साथ रखे जाते हैं। दूसरा, आपका अपना वॉलेट, जहाँ चाबी सिर्फ़ आपके पास है। Unocoin के Asset Controls से आप एसेट्स कभी भी अपने वॉलेट में भेज सकते हैं, जिसे साइट ज़ीरो-फ़ी ट्रांसफ़र बताती है।

अपने वॉलेट में रखने पर 12 या 24 शब्दों की रिकवरी फ़्रेज़ ही सब कुछ है। वे शब्द किसी के हाथ लग जाएँ तो बिटकॉइन जा सकता है, और खो जाएँ तो वापस नहीं आता। इसलिए उन्हें कागज़ पर, ऑफ़लाइन लिखिए और किसी को मत बताइए। कोई असली सपोर्ट टीम कभी OTP, पासवर्ड या रिकवरी फ़्रेज़ नहीं माँगती। सोने की चोरी के लिए किसी को घर में घुसना पड़ता है। बिटकॉइन की चोरी के लिए बस एक फ़ोन कॉल काफ़ी है, अगर आप शब्द बता दें।

मेरी अपनी राय, साफ़ शब्दों में

मैं 2011 में एक रोबोटिक्स कंपनी के लिए बैंगलोर आया था और लगभग 2012 में बिटकॉइन से मिला। तब से मेरा मानना है कि बिटकॉइन पैसे का भविष्य है। पर मैंने यह भी देखा है कि जो लोग बिना समझे, दूसरों की बातों में आकर बड़ी रकम लगाते हैं, वे सबसे पहले घबराकर बेचते हैं।

सोना हमें धैर्य सिखाता है। कोई दादी अपने गहने हर हफ़्ते का भाव देखकर नहीं बेचती। अगर आप बिटकॉइन के बारे में सोच रहे हैं, तो वही धैर्य और वही समझ साथ लाइए। पहले सीखिए, फिर तय कीजिए।

शुरुआत के लिए हमारा Learn पेज पढ़िए: बिटकॉइन क्या है, SBP कैसे काम करता है, सुरक्षा और टैक्स, सब आसान भाषा में।

आम सवाल

क्या बिटकॉइन को डिजिटल गोल्ड कहते हैं?

हाँ, बहुत से लोग उसे डिजिटल गोल्ड कहते हैं क्योंकि उसकी कुल संख्या 2 करोड़ 10 लाख पर तय है। पर यह एक तुलना है, सोने जैसी सुरक्षा या नियमों का दावा नहीं।

क्या बिटकॉइन सोने से ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाला है?

हाँ। बिटकॉइन की कीमत सोने के मुकाबले कहीं ज़्यादा तेज़ी से ऊपर-नीचे होती है। उतना ही लगाइए जितना आप बड़ी गिरावट में भी रख सकें।

क्या थोड़ा-थोड़ा बिटकॉइन खरीद सकते हैं?

हाँ। एक बिटकॉइन 10 करोड़ sats में बँटता है। Unocoin पर SBP से ₹10 से शुरुआत की जा सकती है, और SBP ट्रेड पर 0% फ़ीस है।

क्या बिटकॉइन पर सोने जैसे नियम हैं?

नहीं। भारत में क्रिप्टो अनरेगुलेटेड है। मुनाफ़े पर 30% टैक्स और 4% सेस, 1% TDS, और नुकसान का सेट-ऑफ़ नहीं होता। अपने CA से ज़रूर पूछिए।

और पढ़ें

स्रोत